Check Accurate Temperature: बच्चों का तापमान जांचना आसान नहीं, जानें किस उम्र के बच्चे के लिए कौन सा थर्मामीटर सही
इस तरह बच्चों का तापमान मापना चाहिए।
इस तरह बच्चों का तापमान मापना चाहिए।
Most Accurate Way To Take Temperature In Children: अगर कभी घर में बच्चे की तबीयत खराब हो जाती है, तो माता-पिता के साथ ही पूरा परिवार भी चिंतित हो जाता है। क्योंकि छोटे-छोटे से बच्चे बीमारी या शरीर में हो रही किसी भी परेशानी को बोलकर सही तरह से समझा नहीं पाते हैं। अगर कभी आपको लगता है कि बच्चे को बुखार है तो आगे के इलाज के लिए तापमान का सटीक माप लेना बहुत जरूरी होता है। ऐसे में बुखार नापने के लिए आपके पास बच्चे की उम्र के उपयुक्त एक अच्छा थर्मामीटर होना चाहिए, जो बिल्कुल सही रीडिंग देता हो। बता दें कि बच्चों के लिए बाजार में कई तरह के थर्मामीटर आते हैं। लेकिन आपके बच्चे के लिए सबसे सही थर्मामीटर कौन सा रहेगा, यह जानने के लिए आपको इस आर्टिकल को पूरा पढ़ना चाहिए।
जानिए बच्चों का बुखार मापने का सही तरीका
अगर आपके बच्चे को बुखार है, तो तापमान मापने के लिए आपको थर्मामीटर का इस्तेमाल करना चाहिए। कई लोग उनके माथे और कलाई को छूकर शरीर के तापमान का अंदाजा लगाने की कोशिश करते हैं। लेकिन सही ट्रीटमेंट के लिए बच्चे के शरीर का सटीक तापमान पता होना बहुत जरूरी है और थर्मामीटर से आपको यह सटीक रीडिंग बहुत आसानी से मिल जाएगी। तापमान मापने के लिए आपको महंगा थर्मामीटर खरीदने की जरूरत नहीं है। डिजिटल थर्मामीटर को अक्सर सबसे बेहतर और सटीक रीडिंग वाला माना जाता है। इसे आप बच्चे की गुदा, मुंह या बगल में लगाकर उसका तापमान पता कर सकते हैं।
अब जानते हैं बुखार मापने के लिए कौन सा थर्मामीटर बेहतरीन
बताते चलें कि बाजार में कई तरह के डिजिटल थर्मामीटर उपलब्ध हैं, जिनसे शरीर के अलग-अलग हिस्सों से तापमान का पता लगाया जा सकता है। हालांकि, कुछ थर्मामीटर द्वारा तापमान मापने का तरीका अन्य की तुलना में ज्यादा सटीक रहता है। कई थर्मामीटर स्किन के संपर्क में आकर तापमान का पता लगाते हैं, इन्हें कांटेक्ट थर्मामीटर कहते हैं। वहीं कुछ थर्मामीटर स्किन को छुए बिना ही तापमान माप ले लेते हैं, जिन्हें नो कांटेक्ट थर्मामीटर कहा जाता है। कांटेक्ट थर्मामीटर में इलैक्ट्रॉनिक हीट सेंसर के जरिये शरीर का तापमान पता चलता है। इन्हें मुंह, बगल, माथे या गुदा पर इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं नो कांटेक्ट थर्मामीटर में स्किन को छूए बिना ही इंफ्रारेड के जरिये तापमान माप लिया जाता है। इनका इस्तेमाल आमतौर पर माथे से तापमान मापने के लिए किया जाता है।
- रेक्टल थर्मामीटर
रेक्टल थर्मामीटर को गुदा थर्मामीटर भी कहा जाता है। इस तरीके से बुखार नापने पर आपको नवजात शिशु के तापमान की सबसे सटीक रीडिंग मिलेगी। इसके लिए आप खासतौर पर रेक्टल थर्मामीटर का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर सामान्य डिजिटल थर्मामीटर के जरिये भी गुदा से तापमान माप सकते हैं। रेक्टल थर्मामीटर 0 से तीन महीने तक के शिशुओं के लिए ही अच्छी तरह काम करते हैं। इससे ज्यादा उम्र के बच्चे बुखार मापने के इस तरीके को पसंद नहीं करें और छटपटाने लगे। इससे बच्चे को चोट लगने या गलत रीडिंग आने का डर भी रहता है।
- डिजिटल थर्मामीटर
शिशु की बगल में लगाने वाले डिजिटल थर्मामीटर भी बुखार की सही रीडिंग बताते हैं। इन्हें इस्तेमाल करना भी बहुत आसान होता है। अगर उम्र की बात करें तो पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बगल में थर्मामीटर लगाकर शरीर का तापमान मापना सबसे अच्छा तरीका होता है। इसके लिए आपको थर्मामीटर की टिप को शिशु की बगल में लगाना है। साथ ही सुनिश्चित करें कि यह सीधे त्वचा के संपर्क में हो। बीप की आवाज आने तक इसे लगाए रखें। बच्चे की बाजू को शरीर से सटाकर रखें, क्योंकि शिशु के हिलने-डुलने पर गलत रीडिंग आ सकती है।
- ओरल थर्मामीटर
ओरल थर्मामीटर अगर सही ढंग से इस्तेमाल किए जाएं तो यह भी सटीक रीडिंग बताते हैं। इस तरह के थर्मामीटर को चार साल या इससे बड़े बच्चों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया में बच्चे को थर्मामीटर को निर्धारित समय तक मुंह में लगाए रखना होता है। अगर बच्चे ने कुछ खाया या पीया है तो इसके 15 मिनट के बाद ही तापमान को मापना चाहिए। थर्मामीटर की टिप को बच्चे की जीभ के नीचे पीछे की तरफ लगाएं, मुंह बंद रखें। रीडिंग पूरी होने पर आवाज आएगी, तब इसे मुंह से निकाल लें।
- ईयर थर्मामीटर
सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो कान के थर्मामीटर सही तापमान बता देते हैं। इसमें इंफ्रारेड के जरिये ear canal के तापमान को मापा जाता है। मगर इसका इस्तेमाल करने के लिए अभ्यास की जरूरत होती है, इसे सही तरीके से कान में लगाना जरूरी है। नहीं तो सही और एक जैसी रीडिंग मिलना मुश्किल है। तीन महीने से ज्यादा उम्र के शिशु के लिए उचित है। शिशु तीन महीने से छोटा हो, तो इस थर्मामीटर का इस्तेमाल काफी मुश्किल रहता है क्योंकि उसकी ear canal बहुत छोटी होती है। इस प्रक्रिया में थर्मामीटर की टिप शिशु के कान में लगाएं और डिस्प्ले पैनल पर रीडिंग आने तक इंतजार करें।
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