RTI Disclosure: जिंदगी बचाने वाले कर रहे सुसाइड, पढ़िये मेडिकल स्टूडेंट्स आखिर क्यों उठा रहे आत्मघाती कदम
मेडिकल स्टूडेंट्स स्ट्रेस के चलते सुसाइड कर रहे हैं।
मेडिकल स्टूडेंट्स स्ट्रेस के चलते सुसाइड कर रहे हैं।
Know Why Medical Students Commits Suicide: देश के बड़े से बड़े मेडिकल कॉलेज आजकल सुसाइड के मामलों को लेकर खबरों में रहते हैं। साल 2010 से 2019 के बीच हुई एक स्टडी में चौंकाने वाला डेटा सामने आया है। यह डेटा सुसाइड करने वाले मेडिकल स्टूडेंट्स से संबंधित हैं। आंकड़ों के हिसाब से इन सालों के बीच 358 मेडिकल स्टूडेंट्स ने सुसाइड कर लिया था, वहीं 1166 मेडिकल स्टूडेंट को कॉलेजों से बाहर निकाल दिया गया। सुसाइड की लिस्ट में 125 मेडिकल स्टूडेंट, 105 रेसिंडेशियल, 128 डॉक्टर्स शामिल हैं। नेशनल मेडिकल कमिशन ने मेडिकल स्टूडेंट को लेकर हाल ही में राइट टू इनफॉर्मेशन यानी RTI से जवाब मांगा था। इस जवाब में सामने आया कि पिछले 5 सालों में 64 एमबीबीएस और 55 पोस्टग्रेजुएट मेडिकल स्टूडेंट ने सुसाइ़ड कर के अपनी जान गंवा दी है।
जानिए क्या कहता है सुसाइड का आंकड़ा
मेडिकल स्टूडेंट्स के सुसाइड करने के पीछे की वजह बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेना है। यही कारण है कि 1166 मेडिकल स्टूडेंट ने कॉलेज को बीच में ही ड्रॉप कर दिया। कॉलेज छोड़ने वाले स्टूडेंटस में 160 एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे और 1006 ग्रेजुएशन कर रहे थे। डेटा के हिसाब से यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि मेडिकल स्टूडेंट्स के बीच स्ट्रेस दिन पर दिन काफी बढ़ रहा है। मेडिकल स्टूडेंट्स के बीच सुसाइड और सुसाइडल टेंडेंसी की घटनाओं ने चिंताए बढ़ा दी है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बीते सालों में मेडिकल स्टूडेंट्स के सुसाइड संबंधी आंकड़े मांगने का निर्णय इसलिए लिया गया, ताकि पता किया जा सके कि कहीं ये मामले रैगिंग, पढ़ाई के प्रेशर या ज्यादा वर्क लोड की वजह से तो नहीं है। हालांकि,मेडिकल स्टूडेंटस की सुसाइड के पीछे क्या कारण है, इसका पता नहीं चल पाया है।
इन डेटा के आधार पर तैयार की यह स्टडी
बता दें कि स्टडी में भारत में मेडिकल छात्रों की सुसाइड से जुड़ा यह डेटा ऑनलाइन समाचार पोर्टल और गूगल डेटाबेस के आधार पर तैयार किया गया है। सुसाइड करने वाले सबसे ज्यादा छात्र 22.4 प्रतिशत के साथ एनेस्थिसियोलॉजी में और 16.0 प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर ओबेस्ट्रिक- गाइनोकॉलेजी कोर्स से हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी AIIMS के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि लगभग सभी मेडिकल कॉलेजों में नियम, सुरक्षा उपाय और सहायता प्रणाली प्रदान की जाती है, लेकिन इन चीजों को जमीनी तौर पर सही ढंग से लागू नहीं किया गया है। जैसे कि कई मेडिकल कॉलेज में एंटी-रैगिंग कमेटी है, जो शिकायतों की निगरानी करती है। हालांकि, इन जगहों का माहौल बहुत ही ज्यादा टॉक्सिक होता जा रहा है।
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