यूरिन का रंग बदलना सेहत के लिए हानिकारक होता है।
यूरिन का रंग बदलना सेहत के लिए हानिकारक होता है।
Why Color Of Urine Starts Changing: कई बार जब हम किसी बीमारी का इलाज करवाने के लिए अस्पताल जाते हैं, तो डॉक्टर हमें यूरिन टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। अब यह टेस्ट उसी वक्त के ताजे यूरिन से भी हो सकता है या फिर सुबह-सुबह उठते ही आने वाला सबसे पहले यूरिन से भी हो सकता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यूरिन टेस्ट करवा के डॉक्टर आखिर पता क्या लगाते हैं। दरअसल इंसान का यूरिन उसके शरीर से जुड़े कई गहरे राज खोल देता है। आपको जानकर हैरानी होगी यूरिन का कलर बदलने से शरीर में पनप रही गंभीर बीमारियों का पता लगाया जा सकता है। आप किसी भी तरह कि बीमारी से ग्रस्त क्यों न हो, उसका असर आपके पेशाब के रंग पर जरूर पड़ता है।
बता दें कि कभी-कभी बिना किसी लक्षण के भी ये रंग बदल सकता है। इंसान की बॉडी में अनक्रोम पिग्मेंट होते हैं, जिनकी वजह से पेशाब का रंग बनता है। यह पिग्मेंट जितना संकेंद्रित यानी Concentrated होता है, पेशाब का रंग उतना ही गहरा होता है। आमतौर पर यूरिन का रंग हल्का पीला और हल्का मटमैला लेकिन पारदर्शी होता है। लेकिन अगर शरीर में ज्यादा मात्रा में लिक्विड पहुंचता है तो इससे यूरिन का रंग बदल जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर आपको कभी पेशाब का रंग असमान्य दिखे तो यह आपके लिए खतरे का संकेत हो सकता है।
पढ़िए पेशाब का बदलता रंग आपकी सेहत को लेकर क्या संकेत देता है...
1. पेशाब का रंग लाल होना
पेशाब के बदलते रंगों में पिंक, रैड, ब्राउन, ऑरेंज या ब्लैक कलर शामिल होते हैं। ऐसा पेशाब में ब्लड मौजूद होने की वजह से हो सकता है, या फिर या मूत्रनली और किडनी रोग का सूचक होता है। महिलाओं में पेशाब का रंग बदलने की समस्या मासिक धर्म की वजह से भी हो सकती है। वहीं इसके मूल कारण की बात करें तो पोरफाइरिया एक असामान्य रोग है, जिसके चलते पेशाब में पोरफायरिन की मात्रा बढ़ जाती है और पेशाब का रंग लाल हो जाता है। बता दें कि ये समस्या पेशाब में ब्लड की मौजूदगी न होने पर भी हो सकती है। कई बार कुछ दवाएं जैसे कि एंटी टीबी ड्रग रिफैमपिसिन, ब्लड थिनर वारफरिन भी पेशाब को लाल कर देती हैं।
2. पेशाब का काला या भूरा रंग होना
कुछ दवाओं के कारण भी पेशाब का रंग काला हो सकता है। कभी-कभी आयरन के इंजेक्शन भी ब्लेक यूरिन का कारण बनते हैं। एक रेयर किस्म का आनुवांशिक विकार अल्काप्टोनुरिया की वजह से भी पेशाब का रंग काला हो सकता है, जो कि शरीर में होमोजेनेटेसिक के जमाव की वजह से होता है। पेनकिलर ड्रग एसिटामाइनोफिन की ओवरडोज की वजह से भी पेशाब का रंग भूरा होता है। एक दुर्लभ किस्म के कैंसर मेटास्टेटिक मेलानोमा के कारण स्किन की रंगत काली पड़ सकती है साथ ही पेशाब का रंग भी काला हो सकता है।
3. सफेद रंग का पेशाब होना
पेशाब में खनिजों का जमाव होने कि वजह से भी पेशाब का रंग बदल सकता है। शरीर में कैल्शियम, ऑक्सेलेट और फॉस्फेट की वजह से पेशाब सफेद रंग का दिखायी देता है। लेकिन कई बार मूत्रनली में गंभीर संक्रमण होने की वजह से पेशाब में पस आने लगता है, जिसकी वजह से उसका रंग सफेद दिखता है। पेशाब का रंग दूधिया सफेद दिखने का एक अन्य कारण काइल्यूरिया यानी यूरिन में फैट है। ऐसा तब होता है जबकि मूत्रनली और लिंफेटिक्स के बीच असामान्य कम्युनिकेशन होता है, जिसके कारण फैट का फ्लो आंतों से जिगर की ओर होने लगता है। आमतौर पर ऐसा फिलेरियल इंफेक्शन के कारण होता है।
4. नीला और हरे रंग का पेशाब होना
बता दें कि पेशाब का पूरी तरह से नीला रंग बहुत ही रेयर मामलों में होता है, क्योंकि ब्लू पिगमेंट नेचुरल यूरिन पिगमेंट यूरोक्रोम से मिलकर ग्रीन बना जाता है।
जानिए यूरिन का रंग बदलना कब है खतरनाक
बताते चलें कि आमतौर पर यूरिन का रंग शरीर को मिलने वाले तरल पदार्थों पर निर्भर करता है। तरल पदार्थ शरीर में जितने जाते हैं, वह यूरिन में यैलो पिग्मेंट को उतना ही पतला कर देते हैं। अगर आप ज्यादा पानी पीएंगे तो यूरिन का रंग उतना ही ज्यादा साफ होगा, जब कम पानी पीया जाए तो यूरिन का रंग यैलो के साथ-साथ गाढ़ा हो जाता है। यही कारण है कि यूरिन का रंग खाने-पीने पर निर्भर करता है, चुकंदर, जामुन या कुछ दवाओं के सेवन की स्थिति में यूरिन का कलर हरा, पीला, नीला आदि हो सकता है। इसलिए ऐसा बिल्कुल नहीं है कि यूरिन का रंग बदलने पर हर बार किसी बीमारी का ही खतरा हो। लेकिन अगर बिना कुछ खाए-पीए पेशाब का रंग बदलता है तो यह किसी बीमारी के संकेत हो सकते हैं।
यूरिन का रंग बदलने पर डॉक्टर के पास कब जाएं
अगर इंसान को यूरेनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन यानी यूटीआई हो जाता है या किडनी में स्टोन हो जाता है, तो यूरिन का रंग खून के रंग जैसा दिखने लगता है। इस स्थिति में यूरिन पास करते समय दर्द होता है, लेकिन अगर दर्द नहीं हो रहा है और यूरिन का कलर लाल है, तो यह खतरे का गंभीर संकेत हो सकता है। कभी-कभी यूरिनरी ट्रैक्ट में बैक्टीरियल इंफेक्शन होने से यूरिन का रंग नीला भी हो सकता है। जिस बीमारी को हाइपरकैल्सीमिया या ब्लू डायपर सिंड्रोम का संकेत कह सकते हैं। अगर यूरिन का कलर डार्क या ऑरेंज कलर का हो जाए, तो भी यह खतरे की घंटी है, ऐसी कोई भी स्थिति दिखने पर आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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