कबूतरों को खाना खिलाने से शरीर को नुकसान होगा।
कबूतरों को खाना खिलाने से शरीर को नुकसान होगा।
Pigeon Breeder Disease And Its Symptoms: गर्मियों के मौसम की शुरुआत हो चुकी है, ऐसे में बहुत से लोग अपने घरों की छतों पर पक्षियों के खाने के लिए दाना और पानी रखते हैं। किसी भूखे और प्यासे को खाना और पानी देना बहुत ही पुण्य का काम होता है। फिर चाहे वह इंसान हो या बेजुबान पक्षी, आप जिस भी जीव की मदद करते हैं, वह आपको पूरे दिल से दुआएं देते हैं। लेकिन, आजकल इन बेजुबान पक्षियों की वजह से लोगों में गंभीर बीमारियां देखने को मिल रही हैं। विशेषज्ञोें के मुताबिक कबूतरों को दाना चुगाना इंसान की सेहत के लिए भारी पड़ सकता है। ऐसे में पक्षियों को दाना चुगाते समय आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। दरअसल, पक्षियों के संपर्क में आने से लंग्स की गंभीर बीमारी हो सकती है। आइये इस गंभीर समस्या के बारे में सबकुछ जानते हैं।
दिल्ली में बढ़ रहा संक्रमण का खतरा
देश की राजधानी दिल्ली में बहुत से लोग कबूतर और अन्य पक्षियों को दाना खिलाते हैं। कई चौराहों पर दाना बेचने वाले बहुत से लोग देखें जाते हैं, इन्हीं से दाना खरीद कर लोग कबूतर और अन्य पक्षियोें को दाना खिलाते हैं। यही कारण है कि दिल्ली में पक्षियों से होने वाले संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
इस बीमारी के फैलने की संभावना बढ़ रही
बता दें कि कबूतर और अन्य पक्षियों से होने वाले इस संक्रमण को पीजियन ब्रीडर डिसीज कहा जाता है। यह फेफड़ों में होने वाला एक गंभीर संक्रमण है, इसे बर्ड फैन्सियर रोग, फार्मर लंग्स के नाम से भी जाना जाता है। मेडिकली भाषा में इसे सेंसटिव न्यूमोनिटिस यानी एचपी कहते हैं। एचपी एक प्रकार का इंटरस्टिशियल लंग डिजीज यानी आईएलडी है। यह इंसान की सांस के कार्बनिक पदार्थ एंटीजन के संपर्क में आने के बाद उत्पन्न होती है। कुछ मामलों में बैक्टीरिया के संपर्क में आने से भी ये स्थिति पैदा हो जाती है।
इन लोगों को ज्यादा खतरा
बताते चलें कि इस बीमारी की चपेट में आने का खतरा हर इंसान को नहीं है। यह बीमारी उन लोगों को ज्यादा होती है, जो कबूतरों के संपर्क में ज्यादा रहते हैं। बार-बार उन्हें खाना खिलाते हैं, साथ ही उनके मल के संपर्क में आते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक सीटी स्कैन, पल्मोनरी फंक्शन टेस्टिंग मशीन, और ब्रोन्कोस्कोपिक से लंग्स इन्फेक्शन की जांच की जा सकती है और इस तरह बीमारी का पता लगाया जा सकता है।
बीमारी में दिखते हैं ये लक्षण
इस बीमारी से संक्रमित होने पर कई लोगों में अलग-अलग तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। इन लोगों को अस्थमैटिक अटैक आना, लंग्स का गंभीर संक्रमण, खांसी, जुकाम आदि शामिल हो जाते हैं। इससे फाइब्रोटिक फेफड़े की बीमारी हो सकती है। घर में बर्ड नेट लगाने और बर्ड ड्रॉपिंग की नियमित सफाई से इस जोखिम को रोका जा सकता है। बता दें कि इस बीमारी से बचाव के लिए कबूतरों की ब्रीडिंग पर नियंत्रण करना चाहिए।
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