कोरोना वायरस महामारी के बाद टीबी का खतरा बढ़ गया है।
कोरोना वायरस महामारी के बाद टीबी का खतरा बढ़ गया है।
Know What Is Tuberculosis: इस समय भारत में कोरोना वायरस के नए वेरिएंट XBB.1.16 और इन्फ्लुएंजा A का सब वेरिएंट H3N2 वायरस बहुत तेजी से फैल रहा है। मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के मुताबिक, देश में कोरोना के मामले एक बार फिर बढ़ने लगे हैं। इस सबके बीच एक्सपर्ट्स ने ट्यूबरक्लोसिस में कोरोना से खतरा होने की बात की है। बता दें कि ट्यूबरकुलोसिस फेफड़ों में होने वाला इंफेक्शन है, जो पूरे शरीर पर बहुत ही बुरा असर डालता है। इसलिए जरूरी है कि आप इसके शुरूआती लक्षणों से लेकर उपचार तक के बारे में सब कुछ अच्छी तरह से जान लें।
अगर टीबी के इलाज को लेकर बात की जाए तो इस बीमारी का इलाज 6 महीने तक चलता है। इस अवधि में लगातार डॉक्टरों द्वारा बताई दवाएं समय से खाने वाले मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। आज से कई साल पहले तक टीबी एक लाइलाज बीमारी हुआ करती थी। हालांकि अब टीबी का 100 प्रतिशत इलाज मुमकिन हो गया है। इसके बावजूद यह बीमारी चिंता का सबब बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी उन लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक होती है, जो पहले से किसी दूसरी बीमारी से जूझ रहे हैं। कोरोना महामारी के बाद से इस बीमारी के मामले बढ़े हैं। डायबिटीज पेशेंट को टीबी का खतरा ज्यादा होता है।
आइए जानें क्यों खतरनाक है ट्यूबरक्लोसिस
जब किसी व्यक्ति को तीन हफ्ते से ज्यादा खांसी रहती है, तो उसे ट्यूबरक्लोसिस की जांच कराने की सलाह दी जाती है। ट्यूबरक्लोसिस फेफड़ों में होने वाला एक बहुत ही खतरनाक संक्रमण है, जो धीरे-धीरे इंसान के पूरे शरीर को अपनी चपेट में लेकर रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी पर असर डालता है। इस बीमारी के मुख्य लक्षणों में तेज खांसी, बलगम और खांसते वक्त खून आना आदि शामिल हैं।
क्या हैं टीबी के लक्षण
थकान
कमजोरी
वजन कम होना
तेज बुखार
सीने में दर्द
लगातार खांसी आना
खांसी के साथ ब्लड आना।
कोरोना और ट्यूबरक्लोसिस में क्या है संबंध
ट्यूबरक्लोसिस में इंसान की इम्युनिटी बहुत ज्यादा कमजोर हो जाती है। इसके कारण उन्हें कोई भी संक्रमण बहुत आसानी से अपनी चपेट में लेते हैं। वहीं, कोरोना वायरस भी इंसान की इम्युनिटी पर ही वार करता है, जिस वजह से व्यक्ति की परेशानियां और ज्यादा बढ़ जाती हैं। एनसीबीआई के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ट्यूबरक्लोसिस COVID-19 रोग के 2.10 गुना जोखिम को बढ़ा देता है। डॉक्टरों की मानें तो ट्यूबरक्लोसिस से ग्रस्त लोगों को कोरोना होने की संभावना आम इंसान के मुकाबले बहुत ज्यादा होती है।
टीबी से ग्रस्त लोग खुद को कैसे बचाएं
- टीबी के इलाज पूरा करवाएं : कई लोग अपने आपको डॉक्टर समझकर थोड़ी सी भी तबीयत ठीक होने पर दवाइयां खाना बंद कर देते हैं, आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। टीबी की बीमारी का अगर पूरा इलाज न किया जाए तो यह इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। संक्रमण से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि ट्यूबरक्लोसिस का ठीक से इलाज किया जाए। अधूरा इलाज या सावधानी न बरतना आपकी समस्या को और भी ज्यादा बढ़ा सकते हैं।
- लाइफस्टाइल में करें हेल्दी बदलाव : आजकल के लोग अपने काम को लेकर इतने बिजी हैं कि वह ज्यादातर बैठे ही रहते हैं। कई लोग आलस के कारण भी ज्यादा एक्टिव नहीं होते हैं, लेकिन आपका ये लाइफस्टाइल भी आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। आपको रोजाना व्यायाम और खुश रहने पर ज्यादा ध्यान देना होगा। संक्रमण पर जीत हासिल करने के लिए लाइफस्टाइल एक्टिव रखना बहुत ही बेहतरीन तरीका है।
- डाइट पर ध्यान दें : हेल्दी डाइट आपको हर तरह के संक्रमण से बचाती है। यह बचाव का सबसे बेहतरीन तरीका है। एक्सपर्ट की मानें तो सभी आवश्यक पोषक तत्वों के साथ प्रोटीन की सही मात्रा आपको डाइट में शामिल करनी चाहिए। इससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होगी और संक्रमण होने का खतरा कम हो जाएगा।
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