Pregnancy Tips: गर्भावस्था में हो रही ब्लीडिंग साबित होगी जानलेवा, जानें इसके कारण और कैसे करें इलाज

गर्भावस्था में ब्लीडिंग के पीछे की वजह।

गर्भावस्था में ब्लीडिंग के पीछे की वजह।

Bleeding Problems During Pregnancy: प्रेग्नेंसी के दौरान 9 महीने महिलाओं के लिए बहुत नाजुक होते हैं। इस समय में, उन्हें कुछ भी करने या खाने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है। गर्भावस्था में महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस से लेकर ब्लीडिंग तक कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। एक स्टडी के मुताबिक, हर तीन में से एक महिला को प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीनों में ब्लीडिंग की समस्या का एक्सपीरियंस करना पड़ता है, कई बार यह समस्या ज्यादा खतरनाक नहीं होती है। लेकिन, कभी-कभी यह बेहद गंभीर रूप ले लेती है। आमतौर पर ऐसी कोई भी समस्या होने पर आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान कई महिलाएं हल्के भूरे रंग के दाग से लेकर लाल रंग की ब्लीडिंग का एक्सपीरियंस करती हैं। जिससे ऐंठन या पीठ के निचले हिस्से में दर्द होने लगता है। यह समस्या एक दिन से लेकर कई हफ्तों तक भी रह सकती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान क्यों होती है ब्लीडिंग

बता दें कि प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लीडिंग की समस्या किसी भी महीने में हो सकती है। लेकिन, इसके सबसे ज्यादा चांसेज प्रेग्नेंसी कि पहली तिमाही में ज्यादा होते हैं। इसका मतलब है कि महिला को इंटरनल ब्लड क्लॉटिंग हो रही है। प्रेग्नेंसी के दौरान नाल के अच्छी तरह से बच्चेदानी के साथ ना जुड़ने के कारण भी ब्लीडिंग हो सकती है। इसे मेडिकल भाषा में थ्रेटेंड अबॉर्शन कहा जाता है। इसके बाद, 4-6 महीने में भी ब्लीडिंग होने के अलग कारण हो सकते हैं। पहली तिमाही में जो क्लॉटिंग हुई, वो सही ना होने या बढ़ने की वजह से दूसरी तिमाही में ब्लीडिंग हो सकती है। अगर किसी महिला को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या या ट्विन प्रेग्नेंसी है, तब भी ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।

अगर यह ब्लीडिंग की समस्या 6-7 महीने में हो रही है, तो यह प्लेसेंटा या नाल बहुत नीचे होने की वजह से भी हो सकती है। ऐसे मामलों में महिला की जान भी जा सकती है। ऐसे में, महिलाओं को डॉक्टर के बताए दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए। प्रेग्नेंसी के आखिरी तीन महीने में अगर नाल सेपरेट हो जाए, तो ब्लीडिंग हो सकती है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में abruptio placenta कहा जाता है। यह गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए खतरनाक हो सकती है, इससे बच्चे की जान को भी खतरा होता है। कुछ महिलाओं में हल्की-फुल्की ब्लीडिंग और डिस्चार्ज होना नॉर्मल है। लेकिन, आपको इसे नजरअंदाज न करते हुए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

ब्लीडिंग की समस्या से कैसे पाएं राहत

बता दें कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं को भी जोखिम नहीं उठा सकती हैं। इसलिए, आपको सबसे पहले डॉक्टर्स से ही सलाह लेनी चाहिए। लेकिन, हम कुछ पॉइंट्स बताएंगे, जिनका आप ध्यान रख सकती हैं।

- अगर किसी गर्भवती महिला के अंदर हार्मोंस की कमी है, तो हार्मोन सप्लीमेंट इंजेक्शन के जरिए ब्लीडिंग रोकी जा सकती है। ब्लीडिंग ज्यादा हो, तो अलर्ट रहें। क्योंकि, यह मां-बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक है।

अगर नाल नीचे होने की वजह से ब्लीडिंग हो रही है, तो तुरंत ऑपरेशन की सहायता से डिलीवरी की जाती है। वहीं, अगर नाल बच्चेदानी से अलग हो गई है, तब भी यह मां और बच्चे के लिए खतरनाक है।

- प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अपना ब्लड प्रेशर रेगुलर जांचते रहना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि इंटरनल ब्लीडिंग हो रही है या नहीं। अगर किसी मरीज को किसी तरह के इंजेक्शन दिए जा रहे हैं, तो उन्हें ब्लीडिंग के प्रति बहुत सचेत रहना चाहिए। सबसे अहम बात ये है कि डॉक्टर से संपर्क में रहें।



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Pregnancy Tips: गर्भावस्था में हो रही ब्लीडिंग साबित होगी जानलेवा, जानें इसके कारण और कैसे करें इलाज Pregnancy Tips: गर्भावस्था में हो रही ब्लीडिंग साबित होगी जानलेवा, जानें इसके कारण और कैसे करें इलाज Reviewed by HealthTak on March 26, 2023 Rating: 5

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