मिर्गी से मौत होने का खतरा है।
मिर्गी से मौत होने का खतरा है।
Know Everything About Epilepsy: दुनियाभर में Epilepsy के मामलों पर नजर डालें, तो लगभग 5 करोड़ लोग मिर्गी से जूझ रहे हैं। इनमें से तकरीबन 1.2 करोड़ लोग भारतीय हैं। बता दें कि भारत में एपिलेप्सी यानी मिर्गी को लेकर बहुत से मिथक मशहूर हैं। कई लोग मिर्गी को बीमारी नहीं बल्कि भूत-प्रेत की बाधा के रूप में देखते हैं। लेकिन, असल में यह दिमाग से जुड़ी एक तरह की बीमारी है। मेडिकल साइंस में इस बीमारी को न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर भी कहा जाता है। मिर्गी के दौरों पर हाल में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, जिन लोगों को मिर्गी होती है, उनमें कम उम्र में मरने का खतरा ज्यादा होता है। यह अध्ययन अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी द्वारा किया गया था। 20,095 मिर्गी रोगियों पर किए इस अध्ययन में सामने आया कि युवाओं में मौत का जोखिम और भी बढ़ गया था। शोधकर्ताओं ने कहा कि बढ़ा हुआ जोखिम इस बात पर भी निर्भर करता है कि वे कहां रहते हैं, कितनी दवाएं लेते हैं और उन्हें कौन सी अन्य बीमारियां हो सकती हैं।
मिर्गी के कारण हो सकती है रोगी की मौत
हालांकि, शोधपत्र के लेखक और दक्षिण कोरिया के चुनचेओन स्थित कांगवोन नेशनल यूनिवर्सिटी में एमडी, पीएचडी सेओ-यंग ली ने कहा कि हमने स्टडी में पाया कि उन लोगों में भी मौत का जोखिम बढ़ गया है, जिन्हें कोई और बीमारी नहीं है और वे अपने मिर्गी दौरों को कंट्रोल करने के लिए महज एक ही दवा ले रहे हैं। बता दें कि मिर्गी वाले लोग जिन्हें कोई अन्य बीमारी नहीं थी, उनमें सामान्य लोगों की तुलना में मृत्यु का जोखिम 161 परसेंट ज्यादा था। यहां सवाल ये उठता है कि मिर्गी का दौरा किन कारणों की वजह से पड़ता है। बता दें कि मिर्गी के दौरे अक्सर अप्रत्याशित और बिना वजह के पड़ते हैं। लेकिन, कई बार यह ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक, दिमाग में घाव या चोट, ऑटोइम्यून रोग के कारण भी पड़ सकते हैं। मिर्गी के दौरों की पुष्टि तब तक नहीं होती, जब तक व्यक्ति को एक या दो से ज्यादा दौरे न पड़ जाएं।
मिर्गी के दौरे पड़ने के लक्षण
- अस्थायी रूप से बेहोशी
- मांसपेशियों में मरोड़ और अनियंत्रित रूप से काम करना।
- अस्थायी रूप से भ्रम होना, सोचने की शक्ति मंद हो जाना।
- भावनाओं में परिवर्तन
- सुन्न होना
- बोलने या समझने में दिक्कत
- दिल की धड़कन और सांस की गति बढ़ जाना।
- भय, चिंता या डर महसूस करना।
- हाथों व पैरों की गतिविधि में बदलाव।
मिर्गी का इलाज कैसे करें
बता दें कि मिर्गी को कंट्रोल नहीं किया जा सकता है। यह दौरा इंसान को कभी भी और किसी भी जगह पड़ सकता है, लेकिन दवाइयों से इसका इलाज हो सकता है। इसके अलावा आप कुछ सावधानियां जरूर बरतें।
पर्याप्त नींद : इलाज के साथ व्यक्ति को लाइफस्टाइल में बदलाव करना जरूरी है। पर्याप्त नींद लेने से मिर्गी का दौरा पड़ने की संभावना कम होती है। डेली एक्सरसाइज करने से इंसान शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है और तनाव कम होता है।
बैलेंस डाइट : मिर्गी से बचाव के लिए संतुलित आहार बहुत जरूरी है। इंसान को अपना वजन कंट्रोल में रखना चाहिए और पर्याप्त पानी पीना चाहिए। शराब और अन्य अवैध पदार्थों से दूर रहना चाहिए।
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