इन स्थानों पर मौजूद हैं माता के प्रमुख 9 शक्तिपीठ।
इन स्थानों पर मौजूद हैं माता के प्रमुख 9 शक्तिपीठ।
Chaitra Navratri 2023: चैत्र नवरात्रि 22 मार्च यानी कल से शुरू हो रही हैं, नवरात्रि के इन पावन नौ दिनों को मां दुर्गा की उपासना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस दौरान मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है, नवमी के दिन हवन और मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन के साथ इस शुभ पर्व का समापन होता है। हिंदू शास्त्रों के मुताबिक, मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठ हैं। नवरात्रि के दौरान इन शक्तिपीठों पर भक्तों का तांता लगा रहता है। सभी भक्तजन माता के दर्शन करने के लिए इन पवित्र स्थलों पर जाते हैं, ऐसे में आज के इस आर्टिकल में आप जानेंगे शक्तिपीठों से जुड़ी पौराणिक कथा क्या है, साथ ही माता रानी के प्रमुख 9 शक्तिपीठ भारत में कहां स्थित हैं।
जानिए शक्तिपीठों से जुड़ी पौराणिक कथा
माता रानी के शक्तिपीठों से जुड़ी पौराणिक कथा के मुताबिक, प्रजापति दक्ष की पुत्री माता सती के मृत शरीर को लेकर भगवान शिव विलाप करते हुए पृथ्वी पर घूम रहे थे। भगवान शिव की अनुपस्थिति के कारण सृष्टि के संचालन में असंतुलन पैदा हो गया था। जिस वजह से भगवान विष्णु ने शिवजी जी के क्रोध को शांत करने के लिए सुदर्शन चक्र से माता सती के मृत शरीर को टुकड़े-टुकड़े कर दिया था। इस पूरे घटनाकर्म के कारण माता सती के शरीर के अंग और आभूषण जहां-जहां गिरे, वह स्थान शक्तिपीठ के नाम से मशहूर हो गए।
आइये अब जानें कहां मौजूद हैं माता सती के प्रमुख 9 शक्तिपीठ
Kalighat Temple
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित कालीघाट मंदिर देशभर में बहुत मशहूर है। बता दें कि जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र को जब मां सती पर चलाया तो मां के पांव की चार ऊंगलियां इस जगह पर गिरी थीं।
Temple of Ambaji
गुजरात और राजस्थान की सीमा पर बसे बनासकांठा जिले की दांता तालुका की पहाड़ियों के ऊपर अंबाजी मंदिर है। इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यहां मां सती का हृदय गिरा था। नवरात्रि के दौरान यहां पूजा-पाठ के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है।
Harsiddhi Mata Temple
मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित हर सिद्धि मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर महाकाल ज्योतिर्लिंग के पास है, ऐसा कहा जाता है कि यहां मां सती का बांया हाथ और होंठ का ऊपरी हिस्सा गिरा था। नवरात्रि के मौके पर इस मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रहती है।
Jwala Devi Temple
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कालीधर पहाड़ी के बीच में ज्वाला देवी का मंदिर मौजूद है। यहां हमेशा ही भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है, ऐसा कहा जाता है कि इस जगह मां सती के नेत्र गिरे थे।
Kamakhya Devi Temple
असम के गुवाहाटी में कामख्या देवी का मंदिर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यहां मां सती का योनि भाग कटकर गिरा था। इसी कारण इस जगह पर योनि पूजन की मान्यता है।
Tarapith
पश्चिम बंगाल के बीरभूल में मां तारा देवी को समर्पित है। ऐसा कहा जाता है कि यहां मां सती के नयन (तारा) गिरे थे। इस कारण इसका नाम तारापीठ पड़ा। हालांकि प्राचीन समय में इस मंदिर का नाम चंदीपुर था।
Naina Devi Temple
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में मां नैना देवी मंदिर मौजूद है, पौराणिक इतिहास को लेकर बहुत प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि यह मां सती के नेत्र गिरे थे, जिस कारण इस मंदिर का नाम नैना देवी मंदिर पड़ा।
Shri Vajreshwari Devi Temple
हिमाचल प्रदेश में स्थित यह मंदिर प्रमुख 9 शक्तिपीठों में से एक है। ऐसा कहा जाता है कि इस जगह पर मां सती का बांया वक्षस्थल गिरा था। स्तनभाग गिरने पर जो शक्ति प्रकट हुई थी उन्हें व्रजेश्वरी कहा जाता है।
Mahalakshmi Temple
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी का यह मंदिर देशभर में बहुत मशहूर है। ऐसा कहा जाता है कि इस जगह पर मां सती का त्रिनेत्र गिरा था। यह मंदिर इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकि यहां साल में एक बार सूरज की किरणें सीधे देवी की प्रतिमा पर पड़ती है।
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