इन संकेतों के दिखने पर करवाएं ऑटिस्म की जांच।
इन संकेतों के दिखने पर करवाएं ऑटिस्म की जांच।
Know What Is Autism: आजकल के समय में बच्चों के अंदर ऑटिज्म की समस्या देखने को मिलती है। यह एक मानसिक बीमारी है, इस बीमारी की वजह से मस्तिष्क का विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता। इस बीमारी से ग्रस्त बच्चे असली दुनिया को भूलकर अपनी एक अलग ही दुनिया बना लेते हैं। इसलिए कुछ लोग उन्हें मंदबुद्धि समझने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता है। ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चे मंदबुद्धि नहीं होते हैं, ये बात जरूर है कि उन्हें समाज में घुलने मिलने में झिझक महसूस होती है।
ऑटिज्म के क्या होते हैं लक्षण
ऑटिज्म का शिकार बच्चा मानसिक रूप से कमजोर होता है। ऑटिज्म की बीमारी होने पर बच्चों को मिर्गी की समस्या भी हो सकती है, कई मामलों में बच्चों को बोलने और सुनने में भी परेशानी होती है। जब यह बीमारी गंभीर स्तर पर पहुंच जाती है, तब इसे ऑटिस्टिक डिसऑर्डर कहते हैं। वहीं, लक्षण कम होने पर इसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर कहते हैं।
इन संकेतों से करें ऑटिज्म की पहचान
1. जब बच्चे का कॉन्फिडेंस कम हो और वह किसी से बात करते समय आई कॉन्टैक्ट न करें। साथ ही उन्हें घबराहट होती है।
2. ऐसे बच्चे ज्यादातर अकेला रहना पसंद करते हैं। उन्हें किसी के साथ वक्त बिताना पसंद नहीं होता।
3. इस बीमारी की चपेट में आने के बाद बच्चे बात करते हैं तो अपने हाथों का इस्तेमाल नहीं करते।
4. बच्चे एक ही तरह का गेम खेलना पसंद करते हैं, किसी भी उम्र के बच्चे भी ऑटिज्म की चपेट में आ सकते हैं।
5. ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे किसी बात का जवाब देने में समर्थ नहीं होते हैं। वह किसी की बात को अनसुना भी कर देते हैं।
6. ऐसे बच्चों के लिए बदलाव को स्वीकार करना बिल्कुल भी आसान नहीं होता है।
कब करवानी चाहिए ऑटिज्म की जांच
आमतौर पर बच्चे परिवार और बाकी बच्चों के साथ नॉन-वर्बल बिहेवियर के जरिए बातचीत करते हैं। 18 महीने का बच्चा आसान शब्दों को बोलने लगता है और दो साल के होने तक बच्चा दो शब्दों का वाक्य बोलने लगता है। बच्चे के नॉन वर्बल बिहेवियर में परिवार के सदस्यों के साथ इंटरैक्ट करना, अजनबियों को पहचानना आदि शामिल है। 18 महीने से 2 साल की उम्र तक बच्चा हंसकर अपनी खुशी को जाहिर करता है। 2 से ढ़ाई साल का बच्चा अपने परिवार के सदस्यों या भाई-बहनों के साथ आराम से खेलने लगता है। इन वर्बल और सोशल आदतों में देरी होने, बच्चे के ठीक तरह से ना चल पाने और चीजों को ना पकड़ पाने की स्थिति में ऑटिज्म की जांच करनी चाहिए।
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