Holi 2023: होलिका दहन से रंग-बिरंगे गुलालों तक हर रस्म के पीछे है वैज्ञानिक कारण, जानिए वजह

होली का त्योहार मनाने के भी वैज्ञानिक रीजन होते हैं।

होली का त्योहार मनाने के भी वैज्ञानिक रीजन होते हैं।

Why We Celebrate Festival Of Holi Scientific Reasons: रंगों का त्योहार होली अब बस कुछ ही दिनों में आने वाला है। फाल्गुन पूर्णिमा तिथि को पूरे देश में धूमधाम के साथ होली मनाई जाती है। भारत विविधताओं वाला देश है, यहां लगभग हर प्रांत में होली मनाने के लिए अलग रिवाजों का पालन किया जाता है। आमतौर पर इस दिन सभी लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, बढ़िया पकवान खाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि होली का त्योहार आखिर मनाया क्यों जाता है। होलिका दहन से संबंधित पौराणिक कथा के बारे में हम सब जानते हैं, लेकिन इस त्योहार को मनाने के पीछे साइंटिफिक कारण कौन सा है। अगर आप इस बात का जवाब नहीं जानते हैं तो कोई बात नहीं आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे होली के त्योहार से जुड़े वैज्ञानिक कारण क्या है...

होली पर रंग क्यों लगाया जाता है

होली का त्योहार उस समय मनाया जाता है, जब सर्दियां खत्म होकर गर्मियां शुरू होने वाली होती हैं। होली का त्योहार मौसम में हुए बदलाव को बताता है, क्योंकि लोग सर्दियों के समय में रोजाना नहीं नहाते हैं। लेकिन यह कोई अभी की बात नहीं है, प्राचीन भारत में भी ऐसा ही होता था। रोजाना ना नहाना के कारण कई तरह के स्किन इन्फेक्शन्स हो जाते थे, ऐसे में गर्मियों की शुरुआत से पहले शरीर की अच्छे से सफाई की जरूरत होती थी। उस समय में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता था जैसे हल्दी, चुकंदर के पाउडर आदि से होली खेली जाती थी। इस तरह से ना सिर्फ स्किन की बीमारियों को दूर किया जा सकता था बल्कि ये लोगों को नहाने के लिए मजबूर भी करता था। ऐसे में होली के दिन रंग लगाया जाता है।

होलिका दहन के पीछे का साइंटिफिक कारण

आपने पौराणिक कथाओं में होलिका और प्रहलाद की कहानी सुनी होगी। इसी वजह से होली का त्योहार मनाया जाता है। लेकिन अगर होलिका दहन का साइंटिफिक कारण ढूंढने की कोशिश करें तो ये माना जा सकता है कि होली के त्योहार के समय मौसम में बदलाव होता है और बसंत की शुरुआत हो जाती है। बसंत के आते ही यह धरती और भी ज्यादा खूबसूरत जीवित लगने लगती है, यहां बात हो रही है नए पेड़-पौधों और लहलहाते खेतों खलिहानों की। अब क्योंकि नयी फूल और पत्तियां उग रही हैं तो सूखी पत्तियों आदि को जलाने की जरूरत होती है। इसलिए होलिका दहन किया जाता है। वैज्ञानिक कारणों के मुताबिक होलिका दहन में घर बेकार रखें लकड़ी के सामान, खेतों की भूसी और सूखे पेड़-पौधों को जलाया जाता है, जिससे नेगेटिव वाइब्स भी दूर हो जाती हैं।

क्यों की जाती है होलिका की परिक्रमा

अब बात करते हैं होलिका की परिक्रमा करने के पीछे क्या साइंटिफिक कारण है। तो विज्ञान के मुताबिक शरीर में गर्मी पैदा करने और बैक्टीरिया को मारने के लिए आग बहुत अच्छा ऑप्शन होती है। ऐसे में सर्दियों की मौसमी बीमारियों को दूर भगाने के लिए लोग होलिका की आग का सहारा लेते हैं। होलिका की परिक्रमा करने से शरीर को आग की सेक लगती है और इससे हमारे अंदर के बैक्टीरिया आदि खत्म हो जाते हैं और हमे बहुत फायदा होता है।

क्यों गाया जाता है होली का गीत

विज्ञान के मुताबिक, मौसम में बदलाव होने से वातावरण में आलस बहुत बढ़ जाता है। ऐसे में होली के गीत, ढोल, मंजीरा आदि ट्रेडिशनल इंस्ट्रूमेंट बजाने से आलस को दूर भगाने में मदद मिलती है। कई जगहों पर फाल्गुन के गीत हफ्तों तक गाए जाते हैं और ऐसे में फिजिकल मूवमेंट भी होता है। त्योहार मनाने का ये तरीका असल में शरीर को ज्यादा एक्टिव और खुश करता है।



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Holi 2023: होलिका दहन से रंग-बिरंगे गुलालों तक हर रस्म के पीछे है वैज्ञानिक कारण, जानिए वजह Holi 2023: होलिका दहन से रंग-बिरंगे गुलालों तक हर रस्म के पीछे है वैज्ञानिक कारण, जानिए वजह Reviewed by HealthTak on February 22, 2023 Rating: 5

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